पद्म श्री से सम्मानित हुए चंडीगढ़ के ‘बूम वॉरियर’ इंद्रजीत सिंह सिद्धू, 88 साल की उम्र में भी समाज सेवा की मिसाल

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Chandigarh’s ‘Boom Warrior’ Inderjit Singh Sidhu honoured

Chandigarh’s ‘Boom Warrior’ Inderjit Singh Sidhu honoured, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में  मंगलवार को चंडीगढ़ निवासी 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी सरदार इंद्रजीत सिंह सिद्धू को उनकी निस्वार्थ सेवाओं के लिए देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान “पद्म श्री” से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह सम्मान समाज सेवा और स्वच्छता अभियान में उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया। एक समय पंजाब पुलिस में डीआईजी के पद पर सेवाएं देने वाले सिद्धू सेवानिवृत्ति के बाद भी 88 वर्ष की आयु में चंडीगढ़ की सड़कों पर सफाई करने और कूड़ा उठाने के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बने थे।


पुलिस की वर्दी से झाड़ू तक का सफर
पंजाब के संगरूर जिले से संबंध रखने वाले इंद्रजीत सिंह सिद्धू वर्ष 1964 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने पंजाब पुलिस में 35 वर्षों तक उत्कृष्ट सेवाएं दीं और वर्ष 1996 में डीआईजी के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद जब वह चंडीगढ़ के सेक्टर-49 स्थित आईएएस-आईपीएस ऑफिसर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी में रहने लगे, तो आसपास फैली गंदगी और कूड़े ने उन्हें काफी परेशान किया। प्रशासन से शिकायत करने या किसी के कार्रवाई करने का इंतजार करने के बजाय उन्होंने स्वयं झाड़ू और रेहड़ी संभाल ली तथा निस्वार्थ भाव से सफाई अभियान में जुट गए।


पूर्व पुलिस अधिकारी पिछले कई वर्षों से प्रतिदिन सुबह अपने घर से निकलकर सेक्टर-49 की गलियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई करते रहे हैं। वह अक्सर अकेले ही कूड़ा एकत्र कर उसे रेहड़ी या साइकिल रेहड़ी में भरकर निर्धारित स्थान पर पहुंचाते थे। शुरुआती दिनों में लोगों को एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को सड़कों की सफाई करते देख आश्चर्य हुआ, लेकिन सिद्धू बिना किसी परवाह के अपने मिशन में लगातार जुटे रहे।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान
बढ़ती उम्र के कारण उनकी फुर्ती पहले जैसी नहीं रही और चलने-फिरने में भी कठिनाई होने लगी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना सफाई अभियान जारी रखा। पिछले वर्ष जब वह रोज़ की तरह सड़क से कूड़ा उठा रहे थे, तब एक स्थानीय निवासी ने उनके इस प्रेरणादायक कार्य की सराहना करते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दी। सड़कों की सफाई करते हुए सिद्धू के वीडियो तेजी से वायरल हो गए।
देश के प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनका वीडियो साझा करते हुए लिखा था, “उद्देश्य कभी सेवानिवृत्त नहीं होता।” इसके बाद वह पूरे देश में “बूम वॉरियर” के नाम से प्रसिद्ध हो गए और उनके अभियान की चारों ओर सराहना होने लगी।


पहले भी होना था सम्मानित, लेकिन घर पर लगा मिला ताला
इससे पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित करने का निर्णय लिया था। हालांकि जब प्रशासनिक अधिकारी उन्हें निमंत्रण पत्र देने उनके घर पहुंचे तो घर पर ताला लगा हुआ था, जिसके कारण वह सम्मान उस समय उन्हें नहीं मिल सका। इसके बावजूद उनकी निस्वार्थ सेवा निरंतर जारी रही।
अंततः भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें “अनसंग हीरोज” की सूची में शामिल करते हुए पद्म श्री प्रदान करने की घोषणा की। आज यह सम्मान उन्हें औपचारिक रूप से प्रदान किया गया।


आज जब वह नई दिल्ली में देश की प्रतिष्ठित हस्तियों, वैज्ञानिकों और कलाकारों के बीच यह सम्मान प्राप्त कर रहे थे, तब उनकी सादगी देखने योग्य थी। 88 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने कर्मों से यह सिद्ध कर दिया है कि देश और समाज की सेवा के लिए किसी बड़े पद की नहीं, बल्कि नेक इरादों और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। उनका यह प्रतिष्ठित सम्मान चंडीगढ़वासियों और पूरे पंजाब के लिए गर्व का विषय है।